Translate

Monday, May 30, 2011

नानी की चिट्ठी - ७

मेरे चिरंजीवो
सभी खुश रहो, स्वस्थ रहो, कर्मशील रहो .

इस बार सचमुच देर हो गई चिठ्ठी लिखने में. कुछ तो तबीअत ढीली रही और कुछ अपनी बडकी बिटिया के आ जाने से व्यस्तता बढ़ गई.

बडकी बिटिया के दो तुम्हारे जैसे ही प्यारे-प्यारे जुड़वां बेटे हैं- चिंटू और मिंटू. पर तुम तो जानते हो मैं जिस फ्लैट में रहती हूँ वहाँ छत नाम की कोई चीज नहीं. अपार्टमेंट संस्कृति ने हमारे आँगन, छत,चौबारे सब छीन लिए. इसलिए दोनों बच्चे घर में ही धमा-चोकडी मचाते रहते हैं. बडकी बिटिया तो परेशान हो कर कभी डांट भी देती है पर मुझ से नहीं होता. मैं सोचती हूँ, कुछ ही दिनों के लिए आये हैं बच्चे, ऊधम नहीं करेंगे तो क्या भाड झोंकेगे.

कल की ही बात लो. सुबह बिस्तर से उठी तो क्या देखती हूँ कि चिंटू और मिंटू दोनों एक दूसरे पर तकिया फेंक-फेंक कर खुश हो रहे है और अपनी बडकी बिटिया है कि दोनों के पीछे हाथ धो कर पड़ी हुई है.अब तुम सब तो शैतान के भी चाचा हो इसलिय जानते ही होगे कि तकिये का ये खेल अक्सर बच्चे खेलते हैं. यही नहीं इस खेल को किसी-किसी फिल्म में भी फिल्माया जा चुका है. पर इसे जब सामने के फ्लैट वाले बबलू ने देखा तो भागता आया एक कर्रेंट समाचार देने .

बबलू को हम फ्लैट वाले आजतक चैनल के नाम से पुकारते हैं. वह पूरी सोसाइटी की ख़बरें अपनी जेब में जो रखता है. तो उसने बताया कि नानी, पता है-अमरीका के ब्रूकलिन न्यूयोर्क शहर में पिल्लो फायटिंग एक बहुत बड़ा गेम हो गया है और इस पर वर्ल्ड कप दिया जाने लगा है.

बबलू की बात सुन कर मैं चौंकी. पर बबलू अपनी बात पर अडा रहा." विश्वास नहीं हो रहा नानी? मैं जानता हूँ आप आसानी से किसी बात पर विश्वास नहीं करती इसलिए मैं अभी सबूत ले कर आता हूँ. आपकी जानकारी के लिए मैं ये भी बता दूं कि विश्व की सबसे पहली पिल्लो फाइट वर्ल्ड कप चेम्पियन आस्ट्रिया की २४ वर्षीय Gudrun Grondinger बन गई है .

मैंने जानबूझ कर बबलू को प्यार भरी झिडकी दी - चल-चल ज्यादा गप्प गपोड़ी मत बन. भला ऐसे तकिया मार खेल पर कोई वर्ल्ड कप मिलता है.

पर बबलू कुछ ही मिनटों में अपने लैपटॉप के साथ हाज़िर था. उसने जो वेबसाइट दिखाई तो मेरी भी आँखें फटी रह गई. चिंटू और मिंटू तो लैपटॉप की स्क्रीन से ही चिपक गए.

वेब साईट की लिंक थी:http://www.dogonews.com/2011/5/22/pillow-fighting-becomes-a-legitimate-sport

अब हर बार तो नानी पग्लाती नहीं पर इस बार नानी सचमुच कुछ देर के लिए पगला गई और तकिया उठा कर चिंटू की ओर फेंकती हुई बोली -

चल चिंटू ले लपक तकिया/ खेल ये सचमुच है बढ़िया/तकिये नए खरीद के ला/अगला वर्ल्ड कप जीत के ला/

बडकी बिटिया सचमुच हैरान है कि नानी यह क्या कह रही है. पर में उसे बताऊंगी थोड़े, आखिर सीक्रेट नाम की भी कोई चीज होती है न.

तुम्हारी अपनी नानी

No comments:

Post a Comment