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Thursday, June 23, 2011

मेरे कुछ और बाल गीत

ठुमुक-ठुमुक-ठुम मुनवा नाचे



आसमान पर मेघा नाचे
वन में नाचे मोरा ।
ठुमुक-ठुमुक-ठुम मुनुआ नाचे
जैसे नंदकिसोरा ।

हरे पेड़ पर पत्ते नाचें
डाली ऊपर फुलवा ।
टप्पर ऊपर बुंदियां नाचें
अमुवा ऊपर झुलवा ।
दसों दिशा में छननन नाचे
रे बिजुरी का छोरा ।

चूल्हा चढ़ी बटुलिया नाचे
खंभा चढ़ी गिलहरी ।
इंदरजी का धनुआ नाचे
सतरंगी दोपहरी ।
गैया संग-संग बछड़ा नाचे
नाचे दूध कटोरा ।

ठुमुक-ठुमुक-ठुम मुनुआ नाचे
जैसे नंदकिसोरा ।

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घर है छोटा देश हमारा।

घर है छोटा देश हमारा।

चाची तो गुजरात से आई
और पंजाब की हैं भरजाई
ताई जी हैं राजस्थानी
बोलें- ‘म्हारा...थारा..!



सुबह ढोकले पूरन-पूरी
शाम बने रोटी तंदूरी
उसके ऊपर हरी मिर्च की
चटनी का चटकारा।

मम्मी-पापा ताया-ताई
भाई जी उनकी भरजाई
छोटे-से घर में हिलमिल कर
सारे करें गुज़ारा।

घर है छोटा देश हमारा।
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फूलों की टोपी

फूलों का कुर्ता
फूलों की टोपी।
फूलों की टोपी में
देखा एक मोती।


मोती वह ओस का
धूप खिली खो गया।
फूलों की टोपी का
मन उदास हो गया।
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कल की दुनिया हमको चाहिए

न तो बंदूक की न ही बारूद की
कल की दुनिया हमको चाहिए
नए रंगरूप की।



जिसमें न पाठ
पढ़ाया जाए नफ़रत का
जिसमें न राज
चलाया जाए दहशत का
जिसमें सच्चाई की जीत हो
और हार झूठ की।
कल की दुनिया हमको चाहिए
नए रंगरूप की।

जिसमें मेहनत वालों को
अपना फल मिले
जीने को साफ़ हवा
मिट्टी और जल मिले
जिसमें बीमारी न
फैली हो भूख की।
कल की दुनिया हमको चाहिए
नए रंगरूप की।

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रात हो गई

रात हो गई तू भी सो जा
मेरे साथ किताब मेरी!




बिछा दिया है बिस्तर तेरा
बस्ते के अंदर देखो
लगा दिया कलर-बॉक्स का
तकिया भी सुंदर देखो

मुँहफुल्ली अब तो खुश हो जा
मेरे साथ किताब मेरी!

सुबह-सुबह फिर जल्दी-जल्दी
जगना है हम दोनों को
भागम-भागी में स्कूल
निकलना है हम दोनों को

फड़-फड़ न कर अब चुप हो जा
मेरे साथ किताब मेरी!

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पापा की तनख़्वाह में

पापा की तनख़्वाह में
घर भर के सपने।

चिंटू का बस्ता
मिंटी की गुड़िया
अम्मा की साड़ी
दादी की पुड़िया
लाएँगे लाएँगे
पापा जी अपने।


पिछला महीना तो
मुश्किल में काटा
आधी कमाई में
सब्जी और आटा
अगले में घाटे
पड़ेंगे जी भरने।

पापा की तनख़्वाह में
घर भर के सपने।

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माँ जो रूठे

चाँदनी का शहर तारों की हर गली
माँ की गोदी में हम घूम आए ।
नीला-नीला गगन चूम आए ।



पंछियों की तरह पंख अपने न थे
ऊँचे उड़ने के भी कोई सपने न थे
माँ का आँचल मिला हमको जबसे मगर
हर जलन हर तपन भूल आए ।

दूसरों के लिए सारा संसार था
पर हमारे लिए माँ का ही प्यार था
सारे नाते हमारे थे माँ से जुड़े
माँ जो रूठे तो जग रूठ जाए ।

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आशीर्वाद दीजो


छोटों के नमस्कार लीजो
नानी!हमको जी भर आशीर्वाद दीजो ।

आएँगे जब हम ननिहाल में
पूछेंगे-‘तुम हो किस हाल में?’
अपने सब हाल-चाल दीजो ।
नानी!हमको जी भर आशीर्वाद दीजो ।

घुटनों का दर्द हुआ कम कितना
बतलाना जब हो अपना मिलना
बातों में नहीं टाल दीजो
नानी!हमको जी भर आशीर्वाद दीजो ।

भूल नहीं पाए हैं हम अभी
नानाजी की वो हा-हा ही-ही
एक बार फिर निहाल कीजो
नानी!हमको जी भर आशीर्वाद दीजो ।

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फूलों का गजरा

बहना तेरी चोटी में
फूलों का गजरा ।

फूलों के गजरे ने
घर-भर महकाया
बतलाना बतलाना
कौन इसे लाया?
साँसों में छोड़ गया
ख़ुशबू का लहरा ।

गजरे में फूल खिले
बेला-जुही के
आँखों में तेरी हैं
आँसू खुशी के
चेहरे पर बिखरा है
जादू सुनहरा ।

तुझ पर ही नज़रें हैं
छोटे-बड़ों की
बात हुई बहना
आज क्या अनोखी?
क्या इसमें है कोई
राज बड़ा गहरा ?

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दीदी की आँखों में




दीदी लिपस्टिक के नखरे करे ।
छुटकू डोलें मुँह में मिट्टी भरे ।

दीदी को मिली नई फूलदार साड़ी
छुटकू को मिली तीन पहियों की गाड़ी
दीदी कमाऊ है फैशन करे ।
छुटकू डोलें मुँह में मिट्टी भरे ।



दीदी संभालती रहे काला चश्मा
छुटकू चिल्लाते रहें अम्माँ! अम्माँ!
दीदी की आंखों में सपने भरे ।
छुटकू डोलें मुँह में मिट्टी भरे ।

दीदी का सैलफ़ोन बजता ही रहता
कोई है जो बातें करता ही रहता
दीदी हँस-हँस कर क्या बातें करे?
छुटकू के पल्ले न कुछ भी पड़े ।

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चंदोवा तना

पूनम की उजियारी खिली रे जुन्हाई
सिर पर चंदोवा तना ।
हो जी सिर पर चंदोवा तना ।



दूधो नहाए जी महले दुमहले
काले-कलूटे दिखे सब रुपहले
जग-मग हुआ आँगना ।
हो जी सिर पर चंदोवा तना ।

अम्माँ रसोई की करके सफ़ाई
कोठे पे जा बैठी लेकर चटाई
बानक ख़ुशी का बना ।
हो जी सिर पर चंदोवा तना ।

भाग बड़े खुला आकाश पाया
माथे पर है पूरे चाँद का साया
शीतल सुखदायी घना ।
हो जी सिर पर चंदोवा तना ।

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बस्ते में चिप



बस्ते में चिप लगी हुई है सबका अता-पता देगी ।
कौन कहाँ क्या गड़बड़ करता है ये
सभी बता देगी ।

जासूसों की दादी है ये
वह भी नए ज़माने की
ख़बर इसे हो जाती है
पल में हर ठौर-ठिकाने की ।
अगर किसी ने ग़लती की तो ये भरपूर सज़ा देगी ।
कौन कहां क्या गड़बड़ करता है
ये सभी बता देगी ।

छोटी-सी इस चिप का है
कंट्रोल सधे कुछ हाथों में
इस चिप को न ले लेना तुम
हँसी-हँसी की बातों में
ख़तरा होते ही ख़तरे की घंटी कहीं बजा देगी ।
कौन कहाँ क्या गड़बड़ करता है
ये सभी बता देगी।
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images courtesy: Google search.

5 comments:

  1. .बहुत सुंदर .....सभी बाल गीत मनमोहक ...

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  2. इन मनोहारी बाल-रचनाओं के लिए मेरी बधाई स्वीकार करें .
    नीले आसमान पर छा

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  3. अहा ! आज तो सुबह ख़ुशगवार हो गयी.. शुक्रिया...

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  4. धन्यवाद नागेश एवं सैयद भाई. रचनाकार को ऐसे उत्साहवर्द्धक शब्द बल देते हैं. सैयद भाई: तुम मिले तो खुशी दो से चार हो गयी.
    लविज़ा ब्लॉग देखा. वहाँ तो बच्चों के पूरी दुनिया ही हाज़िर है. और भी बहुत कुछ है. बधाई. पहला वाला ब्लॉग खुला नहीं है. शायद लिंक काम नहीं कर रही थी.

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  5. रमेश अंकल आपकी कविताएँ बहुत ही सुन्दर हैं... इन्हें पढ़कर मुझे बहुत अच्छा लगा....

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