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Thursday, July 5, 2012

मेरे कुछ नए शिशु/बाल- गीत



निन्ना कर लो 

चूं-चूं-चूं महारानी जी!
क्या है परेशानी जी?
भूखी हो तो दाने खालो,
प्यासी हो तो पानी पी.

चूं-चूं-चूं महारानी जी!
क्या है परेशानी जी?
रात हो गई,निन्ना करलो
छोड़-छाड शैतानी जी.
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लड्डू 

चार लड्डू लाये दादा
चार लड्डू, चार.
एक चट्टू बंदर ले गया
तेज झपट्टा मार.

तीन लड्डू लाये दादा
तीन लड्डू तीन,
एक काना कौआ ले गया
हाथों मे से छीन.

बाकी गिर कर चूरा हो गए
दो लड्डू दो.
उनको ले गई चींटी सेना
कंधे पर ढो-ढो.

दादा से फिर दादी बोली
अब काहे को रो!.
जिसका दाना, उसका खाना
मुंह ढक कर अब सो.
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मुट्ठी 

एक अंगूठा,
उंगली चार,
मिल गए तो
पंजा तैयार.
पंजा बंद,
बन गई मुट्ठी.
कर देगी अब
सबकी छुट्टी.
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आगड़ बम 

आगड़ बम,
बागड़ बम!
बारिश अभी
न जाना थम.
मस्ती का है
ये मौसम.
हमें मचाना
है धम-धम.
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मुन्ने राजा 

मुन्ने राजा बड़े हुए.
दो पैरों पर खड़े हुए.
गिरते-पड़ते चलते हैं.
पाँव न सीधे पड़ते हैं
धीरे-धीरे सीखेंगे.
पहिया-गाड़ी खींचेंगे.
सरपट-सर जब भागेंगे
सबको नाच नचा देंगे.
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ऑटो रिक्शा 

ऑटो रिक्शा आया है
होरन तेज बजाया है
तीन सवारी लाया है
पूरा शहर घुमाया है
दो सौ रुपया आने-जाने
का ले लिया किराया है.
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झुग्गी वाला बच्चा

पार्क मे जब
खेल-तमाशा  होता है.
झुग्गी वाला
वो बच्चा क्यों रोता है?
सोसाइटी का
गार्ड भगा देता उसको
छोटी-मोटी
रोज सजा देता उसको
वो भी तो है
मेरे जैसा बच्चा मां!
क्या वो  झूला
झूल नहीं सकता मम्मा?
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मजदूर 

अम्मा गिर गई छज्जे से..
बापू दब गए कर्जे से
हम भी घर से दूर हुए..
बचपन में मजदूर हुए.

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5 comments:

  1. वाह बहुत प्यारी और रोचक रचनाएँ हैं. सहज लेखन तो आपकी लेखनी की विशेषता है भाई साहब. बधाई.

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  2. BAHUT SUNDAR AUR ROCHAK RACHNAYEN HAI...BACHCHON KE LIYE ANUPAM UPHAR HAI YAH...BAHUT BAHUT BADHAIYAN...

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  3. बहुत ही बढिया बाल गीत।

    राम राम रमेश जी

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