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Monday, July 9, 2012

जयप्रकाश मानस की तीन चुनिन्दा बाल कविताएं





जयप्रकाश मानस बहुमुखी प्रतिभा-संपन्न एवं अति-संवेदनशील कवि हैं. उनकी वयस्क कविताओं की कृति 'अबोले के बोल' जहां हाल में ही चर्चित हुई है वहीं उनकी बाल कविताओं का एक संग्रह भी यश प्रकाशन, दिल्ली से प्रकाशित हुआ है -'जयप्रकाश मानस की बाल कविताएं' .इस संग्रह से तीन  चुनिन्दा बाल कविताएं यहां प्रस्तुत हैं . तीनों बाल कविताएं आम तौर पर लिखी जा रही बाल कविताओं से अलग तो हैं ही, साथ ही बिना किसी उपदेश के पर्यावरण की दयनीय स्थिति के प्रति वे मार्मिकता के साथ हमें सचेत करती हैं: 


पंछी का मन दुखता

कुआँ है गांव में
कुएं में घटता पानी
सोचकर मछली को
है बड़ी हैरानी.

घास है जंगल में
घास भी मुरझाई
सोचकर गायों की
आंखें भर आईं.

पेड़ है पर्वत में
पेड़ भी लो सूखता
सोचकर पंछी का
मन बहुत दुखता.
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चलो चलें अब झील पर

टांग दें बस्ता कील पर
चलो चलें अब झील पर.

पकडें मछली बंसी डाल
सीपी, घोंघा रखें संभाल
नजर रहे पर चील पर.

जा बैठें फिर नाव में,
घूमें पानी के गांव में
नाविक काका की अपील पर.

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रखते नहीं उधार खेत


सबके  पालन हार खेत
कितने समझदार खेत


देते ये फौलादी ताकत
जैसे हों लुहार खेत


अन्न, फल, फूल,सब्जी देते
सबसे बड़े उपहार खेत

जैसे बोंयें, पायें वैसे 
रखते नहीं उधार खेत.

सीखें लहलहाना इनसे
धरती का श्रृंगार खेत.


साथ निभाते जीवन भर
कृषकों के सच्चे यार खेत.

3 comments:

  1. सुंदर बाल कवितायेँ ....

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  2. बहुत सुन्दर रचनाएँ

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  3. बहुत सुंदर बाल कविताये वाह!

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