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Wednesday, July 11, 2012

मेरे कुछ प्रिय बाल गीत बाल- पाठकों के लिए


लेखकों के पास उनकी अपनी लिखी किताबों की प्रतियां बिलकुल ही सीमित होती हैं इसलिए वे चाह कर भी अपने पाठकों/बच्चों को मुफ्त नहीं बांट पाते. इसका मलाल मुझे भी रहता है. इस उद्देश्य से मैं अपनी कुछ रचनाओं की फोटो प्रतिलिपियां दे कर या उन्हें इन्टरनेट पर उपलब्ध कराकर वितरित करने का माध्यम ढूंढ लेता हूं. बस, इसी उस्द्देश्य से अपने कुछ प्रिय बालगीत यहां साझा कर रहा हूं, आप जिस तरह चाहें  इनका उपयोग करें: 






कोई झांके 

कोई झांके हमारे मन में जरा
तो खजाने मिलें
खिलखिलाती हंसी
मीठे गाने मिलें.

हम भी चाहें कोई हमसे बातें करे,
धूप घर में हमारे कुलांचें भरे
चलो ज्यादा नहीं
थोड़ी देर को ही
हमें शैतानियों के बहाने मिलें.

इन किताबों से भी थोड़ी फुर्सत मिले
भूले-भटके कभी प्यारा सा खत मिले
जिसे पढकर नई -
आस हमें जगे
जिंदगी को हमारी भी माने मिलें.
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छुट्टियों में 

छुट्टियों में बोलो क्या काम करोगे?
काम करोगे  या आराम करोगे?

गांव से सटा पोखर
सूखने लगा है
रोज एक ही सवाल
पूछने लगा है
पानी का कब इंतजाम करोगे?

जामुन के पेड़ों के
मिले हें संदेशे,
उनके भी काटने के
हैं अब अंदेशे,
सोचो, कैसे  ये नुकसान भरोगे?

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मेरी झोली में

मेरी झोली में
सपने ही सपने भरे
ले-ले आ कर वही
जिसका भी जी करे.

एक सपना है
फूलों की बस्ती का
एक सपना है
बस मौज मस्ती का,
मुफ्त की चीज है
फिर कोई क्यों डरे?

एक सपना है
रिमझिम फुहारों का
एक सपना है
झिलमिल सितारों का
एक सपना जो
भूखे का पेट भरे.
ले-ले आ कर वही
जिसका भी जी करे.

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सोन मछरिया 

ताल में जी ताल में
सोंमछरिया ताल में.
मछुआरे ने मंतर फूंका
जाल गया पाताल में

थर-थर कांप ताल का पानी
फंसी जाल में मछली रानी,
तड़प-तड़प कर सोनमछरिया
मछुआरे से बोली भैया-
मुझे निकालो, मुझे निकालो,
दम घुटता है जाल में.

जाल में जी जाल में
सोनमछरिया जाल में.

मछुआरे ने सोचा पल भर,
कहा- छोड़ दूं तुझे मैं अगर,
उठ जाएगा दाना-पानी,
क्या होगा फिर मछली रानी?'
मछली बोली रोती-रोती-
'मेरे पास पड़े कुछ मोती,
जल में छोड़ो, ले आऊँगी,
सारे तुमको दे जाऊंगी.'

मछुआरे को बात जंच गई,
बस मछली की जान बच गई,
मछुआरे को मोती दे कर
जल में फुदकी जल की रानी.
सोनमछरिया-मछुआरे की
खत्म हुई इस तरह कहानी.
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एक दुनिया रचें

एक दुनिया रचें आओ हम प्यार की
जिसमे खुशियाँ ही  खुशियाँ हों संसार की.

एक धरती ने हमको दिया है  जनम
एक धरती के बेटे हैं हम, मान लें
अजनबी हों भले हाथ अपने मगर
गर्मियां एक-दूजे की पहचान लें
तोड़-डालें ये दीवारें बेकार की.
एक दुनिया रचें आओ हम प्यार की

धूप गोरी है क्यों, रात काली है क्यों,
इन सवालों का कुछ आज मतलब नहीं,
बांट दें जो बिना बात इंसान को
उन ख्यालों का कुछ आज मतलब नहीं
जोड़कर हर कड़ी टूटते तार की
एक दुनिया रचें आओ हम प्यार की
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चित्र सौजन्य: गूगल 

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