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Friday, July 27, 2012

नानी की चिठ्ठियां ब्लॉग पर एक नया स्तंभ 'पुनर्पाठ' शुरू

नानी की चिठ्ठियां ब्लॉग पर एक नया स्तंभ 'पुनर्पाठ' शुरू किया जा रहा है जिसके अन्तर्गत  बाल साहित्य की  अनेक ऐसी रचनाएं जिन्हें क्लासिक श्रेणी में रखा जाना चाहिए  या जो पुस्तक रूप में कभी प्रकाशित हुईं थी पर आज उन्हें भुला-विसरा दिया गया है , समय-समय पर पाठकों से परचाने की कोशिश की जायेगी. आशा है हमारा यह प्रयास बाल-साहित्य प्रेमियों को पसंद आएगा.

सबसे पहले इन्तजार करिये डॉ. मस्तराम कपूर के बाल उपन्यास 'सुनहरा मेमना' के  पुनर्पाठ. का.....

3 comments:

  1. डॉ. मस्तराम कपूर के बालसाहित्य पर पढ़ना समकालीन बालसाहित्य के उस दौर को समझना है, जब वह परंपरा, संस्कृति, संस्कार आदि के नाम पर लिखी जा रही राजा—रानी, तंत्र—मंत्र जैसी कहानियों से बाहर आने के लिए छटपटा रहा था. यदि पुनर्पाठ के साथ लेखक की मूल रचना भी पढ़ने को उपल्ब्ध कराई जा सके तो यह अत्युत्तम होगा. आभार...

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  2. डॉ. मस्तराम कपूर के बालसाहित्य पर पढ़ना समकालीन बालसाहित्य के उस दौर को समझना है, जब वह परंपरा, संस्कृति, संस्कार आदि के नाम पर लिखी जा रही राजा—रानी, तंत्र—मंत्र जैसी कहानियों से बाहर आने के लिए छटपटा रहा था. यदि पुनर्पाठ के साथ लेखक की मूल रचना भी पढ़ने को उपल्ब्ध कराई जा सके तो यह अत्युत्तम होगा. आभार...

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  3. रमेश जी - इसके साथ-साथ कृपया 'नाक का डाक्टर' के बारे में बताएँ कि वह कब और कहाँ से छपा है... आपने उसे पढने के लिए विवश कर दिया है... इन्तजार रहेगा...

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