Translate

Saturday, October 27, 2012

दो किशोर गीत






दो किशोर गीत 

- रमेश तैलंग 

1. 

थैली का दूध मिला 
बोतल का पानी,
लल्लू, हम बच्चों की क्या जिंदगानी.

 गौरैया,गायें सब 
भाग गईं बस्ती से 
नाता अब नहीं रहा 
कोई भी मस्ती से
नानी को याद नहीं कोई कहानी.

 एक दो कबूतर बस 
गुटर-गूं-गुटर गाते
भूले-भटके से
खिड़की पर हैं आ जाते
थोड़ी-सी उछलकूद, थोड़ी नादानी.

 पहियों पर पांव है,
कोई कितना भागे?
रोज एक ही सवाल-
क्या बनना है आगे?
लिखने-पढ़ने में भी हद की बेईमानी.

2

कहो चांद से- 
वह भी एक दिन पढ़ने जाए 
सरकारी स्कूल में.


बस्ता कंधे पर लटकाए 
सिटी बसों में धक्के खाए
वह भी एक दिन जा टकराए 
किसी जने से भूल में.


कूल..कूल बस न बतियाए,
कभी-कभी माथा भन्नाए 
वह भी एक दिन थक कर आए 
चलते-फिरते धूल में.



Friday, October 26, 2012

एक शिशु खेल गीत : चकई के चकदुम (A Nursery Play Song -Chik-china-chik )


Around one & half a decade before I had written a nursery play song in Hindi  " 'Chakai-ke-chakdum'  which is now a part of the  NCERT - HINDI TEXT BOOK " RIMJHIM-1." Here,  I have made an attempt to adapt in English  with a slight change in content to follow the rhythm  I hope my readers will like it and shall provide me with their  feedback on this composition too:  



Chik-china-chik 
-Ramesh Tailang 

Chik-china,chik-china, chik-china-chik
That is my village hut where we live.

Chik-china,chik-china,chik-china-chik
That is my cow who gives us milk.

Chik-china,chik-china,chik-china-chik
That is my boat which sails us quick.

Chik-china,chik-china,chik-china-chik
That is my orchard, all green,thick.

Chik-china,chik-china,chik-china-chik
Let us all go now  for   a picnic.


चकई के चकदुम
- रमेश तैलंग 

चकई के चकदुम, चकई के चकदुम!
गांव की मडैया, साथ रहें हम-तुम!

चकई के चकदुम, चकई के चकदुम!
ग्वाले के गैया, दूध पियें हम-तुम!

चकई के चकदुम, चकई के चकदुम!
कागज़ की नैया, पार करें हम-तुम!

चकई के चकदुम, चकई के चकदुम!
फुलवा की बगिया,फूल चुने हम-तुम!

चकई के चकदुम, चकई के चकदुम!
खेल खतम भैया, आओ चलें हम-तुम. 



photo credit: google search

Thursday, October 25, 2012

A FUNNY DREAM

A few days before I started translating my children's poetry in hindi to English with a view to make its reach wider among English speaking kids. This is yet another such poem, which hopefully should entertain the  tiny-tot readers including those who are adults, wherever they are. The original Hindi text is also given alongside: 





A Funny Dream 
-Ramesh Tailang


Hey buddy, last night 
I had a funny dream.

I saw, I grew up 
with a long beard 
on my creamy face,
and my grandpa 
got two fresh new teeth
in his toothless mouth.

I saw, all working days 
in our schools 
have turned into holidays 
For the first time
a week came to me with
seven Sundays.

I saw, an official order
has been issued 
directing adults 
to obey their children 
from now on wards.

I know, it was just a dream
but how funny it was. 


सपने की बात

सुनो, सुनो सपने की बात.

मैंने देखा- मेरे मुंह पर
लंबी-सी दाढी उग आई
दादा जी के मुंह में निकले
दो छोटे दुद्धू के दांत.

मैंने देखा, स्कूलों में 
छुट्टी ही छुट्टी है हर दिन.
पहली  बार हुआ जब
हफ्ते में आए हैं संडे सात.

मैंने देखा सरकारी आदेश हुआ है
अब से बूढ़े-बड़े  सभी
मानेंगे बस बच्चों की बात.

सुनो, सुनो सपने की बात.

Photo credit: Google-thedreamzone dot com

Sunday, October 21, 2012

Pt. Shreedhar Pathak and his memorable children's poem: 'Baba aaj del chhe aaye'




Pandit Shreedhar Pathak is one of the Most respected and versatile Hindi poets in 19th century who wrote a number of memorable poems for children. 
'Baba aaj del chhe aaye' is one of his most popular Hindi poem and I am happy to present its English version here, along with the original text in Hindi,  which, hopefully,  would give it a wider reach among the English kids who love poetry.  
(This is purely a non-commercial and non-profit attempt on my part and I am sure that the respective copy-right holder of this composition will take this attempt of mine  in the same perspective.)

बाबा आज देल छे आए 

बाबा आज देल छे आए,
चिज्जी-पिज्जी कुछ न लाए!
बाबा क्यों नहीं चिज्जी लाए, 
इतनी देली छे क्यों आए?
कां है मेला बाला खिलौना,
कलाकंद, लद्दू का दोना, 
चूं-चूं करने वाली चिलिया
चींचीं करने वाली गुलिया.
चावल खाने वाली कहिया,
चुनिया, मुनिया, मुन्ना भैया 
मेला मुन्ना, मेली गैया,
कां मेले मुन्ना का गैया 
बाबा तुम औ कां से आए
आं..आं.. चिज्जी क्यों न लाए?


Grandpa came very late today

Grandpa came very late today,
And didn't bring anything for me.
Um..um..um; he doesn't love me,  
Why he came very late today?

Where are my big lovely dolls?
Where are  my crispy sweet balls?
Chirping bird and baby queen,
Female mouse eating rice,bean.

My toy-baby,  my toy-cow,
I don't find any of them now.
Where is my toy baby's mother?
Where are my cake, bread & butter?

Grandpa, where from you have come?
Tell me, tell me, don't keep mum.

Adapted in English by -Ramesh Tailang 



पापा की तनख्वाह में .........D R E A M S

In the series of children's poetry, here is one more composition  from my Hindi book 'MERE PRIYA BAAL GEET'  (original in Hindi with English version) which demonstrates the hardships of a middle class family. The treatment of English version is little bit  different due to obvious reasons. I wonder whether such like compositions would be easily acceptable in children's poetry because it  goes beyond the traditional contents in children poems. However, the decision lies with the readers:


पापा की तनख्वाह में
- रमेश तैलंग  


पापा की तनख्वाह में 
घर भर के सपने.

चिंटू का बस्ता 
मिंटी  की गुडिया
अम्मा की साड़ी
दादी की पुड़िया 
लाएंगे, लाएंगे 
पापा जी अपने.

पिछला महीना तो 
मुश्किल में काटा 
आधी कमाई में 
सब्जी और आटा 
अगले में घाटे 
पड़ेंगे जी भरने .

पापा की तनख्वाह में 
घर भर के सपने.


D R E A M S 

Papa will make our
all dreams true.

Chintu's school bag
Mintee's doll
wishes of Mom & 
Grandmother, all

Papa will fulfill
one day, hoo!

last month full of 
hardships was
words can't express 
how it passed

Papa will make do
next month too.


illustration courtesy: google

Saturday, October 20, 2012

रात हो गई ......The Night has fallen..

There is a book of my children's poetry in Hindi titled -Mere Priya Baal Geet'. One of its compositions is excerpted here which, one may say, is a new format of lullaby. The original in Hindi and its english version as done by me me is als
o given underneath. I would be grateful if somebody gives a finishing touch to the English version, wherever needed. Now the excerpts:



रात हो गई


 
-रमेश तैलंग 




रात हो गई तू भी सो जा,
मेरे साथ किताब मेरी.




बिछा दिया है बिस्तर तेरा
बस्ते के अंदर देखो,
लगा दिया है कलर बॉक्स का 
तकिया भी सुंदर देखो,
मुँहफुल्ली, अब तो चुप हो जा
मेरे साथ किताब मेरी.




सुबह-सुबह फिर जल्दी-जल्दी 
जगना है हम दोनों को,
भागमभागी में स्कूल
निकलना है हम दोनों को
फड-फड़ न कर, अब चुप हो जा 
मेरे साथ किताब मेरी.




Oh, my lovely little book 


The night has fallen,
now with me
you get to sleep
oh, my lovely little book.

I have made your bed
in my school bag
and have put my colourbox
like a pillow underneath
now ,be happy and show me
a sweet smile on your face,
oh, my lovely little book.

Don't you know,
we both have to be ready
early morning for school
and do our jobs all in hurry,
keeping our mind any how cool,
now, don't be crazy
be silent and get to sleep
oh, my lovely little book. 

Photo courtesy -Google
बा बा ब्लैक शीप अठारहवीं शताब्दी के सुविख्यात शिशुगीतों में से एक है जो आज भी अंग्रेजी स्कूलों में हर बच्चे को सिखाया जाता है. हिंदीभाषी बच्चों के लिए यहां इसका हिंदी रूपांतर प्रस्तुत है जरूरी नहीं कि भाषांतर के कारण यह उतना ही सशक्त हो पर हिंदीभाषी बच्चे इसे अपनी तरह से गुनगुना सकें कम से कम इतना तो किया ही जा सकता है ....(
यह एक गैरव्यावसायिक बिना किसी लाभ का मेरा व्यक्तिगत प्रयास है जो हिंदी भाषी बच्चों को विदेशी साहित्य से परिचित कराने के लिए किया जा रहा है. आशा है इस रचना के स्वत्वाधिकार स्वामी इस  प्रयास को इसी परिप्रेक्ष्य में ग्रहण करेंगे.) 








Baa Baa Black Sheep

Baa baa black sheep,
Have you any wool?


Yes sir, yes sir,
Three bags full!

One for the master,
One for the dame



And one for the little boy
Who lives down the lane.




श्यामा भेड़



श्यामा भेड़! श्यामा भेड़!
है क्या थोड़ी ऊन 



हां जी, हां जी,पास मेरे
तीन थैले ऊन

पहला मालिक,और दूसरा
मालकिन को दूँगी 



तीजा, अपनी गली के
नन्हे बच्चे को दे दूँगी 




-हिंदी रूपांतर -रमेश तैलंग 

चित्र सौजन्य -गूगल सर्च

सारा जोसेफा हेल का सबसे मशहूर बाlल गीत 'मैरी हेड ए लिटिल लैम्ब'


अठारहवीं -उन्नीसवीं शताब्दी की मशहूर अमेरिकन लेखिका/कवियत्री सारा जोसेफा हेल का सबसे मशहूर बाल गीत है 'मैरी हेड ए लिटिल लैम्ब' जो अपने अंग्रेजी शब्दावली, कथात्मकता और लयात्मकता के कारण सारी दुनिया में बच्चों को सिखाया जाता है. हिंदी भाषी बच्चों के लिए इसका हिंदी रूपांतर यहां ससम्मान प्रस्तुत है -- यह एक गैरव्यावसायिक बिना किसी लाभ का मेरा व्यक्तिगत प्रयास है जो हिंदी भाषी बच्चों को विदेशी साहित्य से परिचित कराने के लिए किया जा रहा है. आशा है इस रचना के स्वत्वाधिकार स्वामी इस प्रयास को इसी परिप्रेक्ष्य में ग्रहण करेंगे. 



मैरी ने एक मेमना पाला 
-सारा जोसेफा हेल 

मैरी ने एक मेमना पाला
झक्क सफ़ेद नरम ऊन वाला 
मैरी का था वह पिछलग्गू 
चलता उसके पिच्छू-अग्गू 

एक दिन सारे नियम तोड़ कर 
जा पहुंचा स्कूल दौड़ कर
मैरी के संग उसे देखकर 
बच्चे खुश हो गए खेल कर 

टीचर के आ जाने पर भी
राह देखता वह मैरी की 
खड़ा रहा बस धीरज बांधे 
जब तक मैरी आई आगे

बच्चों ने पूछा- 'मैरी से
क्यों है इतना इसको प्यार?' 
टीचर बोले- क्योंकि मेरी 
भी करती है उसको प्यार.' 

-हिंदी रूपांतर : रमेश तैलंग
20-10-2012


Mary Had a Little Lamb
by Sarah Josepha Hale (1830)

Mary had a little lamb,
Its fleece was white as snow;
And everywhere that Mary went,
The lamb was sure to go.

It followed her to school one day,
Which was against the rule;
It made the children laugh and play,
To see a lamb at school.

And so the teacher turned it out,
But still it lingered near,
And waited patiently about
Till Mary did appear.

“Why does the lamb love Mary so?”
The eager children cry;
“Why, Mary loves the lamb, you know,”
The teacher did reply.

चित्र एवं टेक्स्ट: गूगल के सौजन्य से 

सेमुअल टेलर कॉलरिज की एक बालोपयोगी कविता -' आंसर टू ए चाइल्ड'स क्वेश्चन '




इंग्लैण्ड में रोमांटिक मूवमेंट के प्रवर्तकों में से एक   सेमुअल टेलर कॉलरिज अंग्रेजी के प्रख्यात कवि , आलोचक और चिंतक रहे हैं. उनकी कुछ सुविख्यात कवितायें : द राइम ओफ द एंशिएंट मैरिनर और कुबला खान मैंने अपनी स्नातकीय कक्षा में पढ़ी थीं.  यहां  सम्मान के साथ प्रस्तुत है  हिंदी रूपांतर सहित उनकी एक उत्कृष्ट बालोपयोगी कविता : आंसर टू ए चाइल्ड'स क्वेश्चन.. यह एक गैरव्यावसायिक बिना किसी लाभ का मेरा  व्यक्तिगत प्रयास है जो हिंदी भाषी बच्चों को विदेशी साहित्य से परिचित करने के लिए किया जा रहा है. आशा है इस रचना के स्वत्वाधिकार स्वामी इस प्रयास को इसी परिप्रेक्ष्य में ग्रहण करेंगे.



तुमने क्या पूछा कभी 
-सेमुअल टेलर कॉलरिज 

तुमने क्या पूछा कभी -
पंछी क्या गाते  हैं?

गौरैया, कबूतर,
लिनेट और सारिका
सिर्फ चहचहाते हैं
या कुछ सुनाते है ?
ध्यान से सुनो -
वे एक  गीत गुनगुनाते हैं
प्यार है, मुझे प्यार है,
बस गाते चले जाते हैं.

जाड़ा आता  है तो सब चुप हो जाते हैं
ठंडी हवा इतनी तेज चला करती ह
मुझे नहीं पता गाकर हमसे क्या कहती है.
कानों में  सांय-सांय शोर बहुत करती है

पर हरी पत्ती का, फूल का
सूरज की नरम-नरम धूप का -
गीत सुनो
सारे के सारे जब मिलजुल कर गाते हैं
तो सचमुच हम सब का
मन हर ले जाते हैं

और जरा देखो इस पंछी चकोर को
जो हरदम प्रेम में सराबोर रहता है
उसकी जुबान पर एक गीत रहता है
मैं अपनी प्रेमिका चकोरी को
बहुत प्रेम करता हूं
और वो भी मुझसे  बहुत प्रेम करती है
जैसे मैं करता हूं.

हिंदी रूपांतर - रमेश तैलंग



Answer to a Child's Question
-Samuel Taylor Coleridge

Do you ask what the birds say? The sparrow, the dove, 
The linnet and thrush say, " I love and I love'

In the winter they're silent  - the wind is so strong;
What it says, I don't know, but it sings a loud song.

But green leaves, and blossoms, and sunny warm weather,
And singing, and loving -all come back together.

But the lark is so brimful of gladness and love,
The green fields below him, the blue sky above,

That he sings, and he sings; and for ever sings he
i love my love, and my love loves me!'

text and photo: courtesy Google.


Friday, October 19, 2012

जॉन क्लेयर का प्यारा-सा बाल गीत 'दुम मटकाऊ खंजन पंछी''



श्रमिक किसान के बेटे एवं क्लासिक कवि जॉन क्लेयर (1793-1864) का एक बेहद मनोरंजक बाल गीत है -दुम मटकाऊ खंजन पंछी' (Little trotty wagtail) जिसे  हिंदी रूपांतरण सहित यहां ससम्मान प्रस्तुत किया जा रहा है. 
यह एक गैरव्यावसायिक बिना किसी लाभ का मेरा  व्यक्तिगत प्रयास है जो हिंदी भाषी बच्चों को विदेशी साहित्य से परिचित करने के लिए किया जा रहा है. आशा है इस रचना के स्वत्वाधिकार स्वामी इस 

प्रयास को इसी परिप्रेक्ष्य में ग्रहण करेंगे.






दुम मटकाऊ खंजन पंछी

-जॉन क्लेयर (1793-1864)

दुम मटकाऊ खंजन पंछी दुम मटकाता  
बारिश की फुहारों का आनंद उठाता  

हंसी दबाकर,डग-मग डग-मग चाल दिखाता, 
मार झपट्टा किसी कीट को भोज बनाता

और कभी मक्खी पर अपनी नज़र गडाता
पंख सूखने से पहले ही  फुर उड़ जाता 

दुम मटकाऊ खंजन पंछी कीचड़ ऊपर
पदचिन्हों की छाप छोड़ता पंजों को धर  

खूब लगाता गोते फिर उथले पानी में
और कभी ऊपर आजाता मनमानी में 

घर है उसका पास यहीं सूअर बाड़े में 
गर्माहट अच्छी मिलती उसको जाड़े में

विदा तुम्हें ओ दुम मटकाऊ खंजन पंछी
आना, आना दुम मटकाते यूं ही कल इसी तरह 

##

Little Trotty Wagtail
by John Clare (1793-1864)


Little trotty wagtail he went in the rain,
And tittering,   tottering sideways he ne'er got straight again,
He stooped  to get a worm, कीट  and looked up to get a fly,
And then he flew away ere his feathers they were dry.

Little trotty wagtail, he waddled in the mud,
And left his little footmarks, trample  where he would.
He waddled in the water-pudge, and waggle  went his tail,
And chirrupt  up his wings to dry upon the garden rail. 

Little trotty wagtail, you nimble   all about,
And in the dimpling water-pudge you waddle   in and out;
Your home is nigh   at hand, and in the warm pig-stye,
So, little Master Wagtail, I'll bid you a good-bye.

##

टेक्स्ट/ चित्र सौजन्य: गूगल 





आर.एल. स्टीवेंसन का प्यारा-सा बालगीत - गाय





ट्रैजर आईलैंड, किड्नैप्ड जैसी क्लासिक   रचनाओं के प्रणेता स्कोटिश लेखक, कवि, उपन्यासकार आर.एल.स्टीवेन्सन (1850-1894) ने बच्चों के लिए बहुत ही प्यारे-प्यारे गीत लिखे. उनका एक बाल गीत The cow/ 'गाय' हिंदी रूपांतरण सहित यहां ससम्मान प्रस्तुत है यह एक गैरव्यावसायिक बिना किसी लाभ का मेरा  व्यक्तिगत प्रयास है जो हिंदी भाषी बच्चों को विदेशी साहित्य से परिचित करने के लिए किया जा रहा है. आशा है इस रचना के स्वत्वाधिकार स्वामी इस प्रयास को इसी परिप्रेक्ष्य में ग्रहण करेंगे.



गाय
-आर.एल.स्टीवेन्सन

लाल रंग वाली सफ़ेद रंग वाली
गाय मेरी दोस्त है सबसे निराली
देती है भरपूर मक्खन मुझे
पूरी में लगाके मैं खाता जिसे

यहां-वहां खूब वह चक्कर लगाती
समझदार है कहीं भटक नहीं जाती
खुली हवा में बां..बां कर रंभाती
सूरज की धूप भी उसे बहुत भाती

हवा के झकोरे कभी उसे छू जाते
बारिश के छींटे भिगोते-भिगाते
चारागाह में उसकी भूख जग जाती
घास, फूल, पत्तियां, सभी खा जाती

-रमेश तैलंग
21-10-2012



The Cow
-R.L.Stevenson

The friendly cow all red and white,
I love with all my heart:
She gives me cream with all her might,
To eat with apple-tart.

She wanders lowing here and there,
And yet she cannot stray,
All in the pleasant open air,
The pleasant light of day;

And blown by all the winds that pass
And wet with all the showers,
She walks among the meadow grass
And eats the meadow flowers.
####

अंग्रेजी टेक्स्ट: A child's garden of verses 
चित्र सौजन्य:गूगल 

स्टीव स्मिथ का एक प्यारा-सा बाल गीत -परी कथा


स्टीव स्मिथ ( 1902-1971) अंग्रेजी की सुविख्यात लेखिका एवं कवियत्री थीं. उनका वास्तविक नाम फ्लोरेंस मारग्रेट स्मिथ था. उन्होंने उपन्यास भी लिखे और कविताएं  भी . उनकी एक बाल कविता 'The Kingfisher Book of Children's Poetry' से यहां साभार दी जारही है और उसका मेरे द्वारा किया गया हिंदी रूपांतर भी दिया जा रहा है जो हिंदी भाषी बच्चों को रोचक और पठनीय लगेगा, ऐसी आशा है. कवियत्री का परिचय विकिपीडिया पर मौजूद है जिसकी , सन्दर्भ के लिए, लिंक भी नीचे दी जा रही है. यह एक गैरव्यावसायिक बिना किसी लाभ का मेरा  व्यक्तिगत प्रयास है जो हिंदी भाषी बच्चों को विदेशी साहित्य से परिचित करने के लिए किया जा रहा है. आशा है इस रचना के स्वत्वाधिकार स्वामी इस प्रयास को इसी परिप्रेक्ष्य में ग्रहण करेंगे.


FAIRY STORY

By -STEVIE SMITH 


I went into the wood one day
And there I walked and lost my way

When it was so dark I could not see
A little creature came to me

He said if I would sing a song
The time would not be very long

But first I must let him hold my hand tight
Or else the wood would give me a fright

I sang a song, he let me go
But now I am home again there is nobody I know


(Courtesy-The Kingfisher Book of Children's Poetry)




परी कथा 

-स्टीव मिथ 

एक दिन की बात 
मैं जंगल में गया घूमने
आगे चला तो 
रास्ता लगा भूलने
धीरे-धीरे बढ़ने लगा 
अंधेरे का साया , 
आस-पास मुझे 
कुछ नज़र न आया
तभी एक प्राणी 
मेरे नज़दीक आया
बोला -'यदि तुम गाना गाते चलो
तो रास्ता चुटकी में कटेगा
समय का तुम्हें 
कुछ पता नहीं चलेगा' '
मैंने कहा उससे-पहले रखो मेरा हाथ 
अच्छी तरह पकडकर,
अंधेरे में जंगल से 
लगता है मुझे डर'
गाने गाते-गाते 
घर तक मै आ गया 
वह भला प्राणी 
पहुंचाकर चला गया
लेकिन अब मैं हूं यहां 
निपट अकेला 
न कोई दोस्त है 
न कोई मेला.

हिंदी रूपांतर-रमेश तैलंग
19-10-2012 



For further details about the poetess: Please go this link:

http://en.wikipedia.org/wiki/Stevie_Smith

ग्रेस निकोल्स का एक प्यारा-सा बाल गीत

1950 में गुयाना में जन्मी ग्रेस निकोल्स ने बच्चों के लिए बहुत ही प्यारे-प्यारे गीत लिखे हैं. उनका एक बाल गीत 'नानी..मेरे बालों में कंघी करो.' 'The Kingfisher Book of Children's Poetry' से यहां साभार दिया जा रहा है और उसके साथ मेरे द्वारा किया गया हिंदी रूपांतर भी प्रस्तुत है जो हिंदी भाषी बच्चों को रोचक और पठनीय लगेगा, ऐसी आशा है. कवियत्री का परिचय इन्टरनेट  पर मौजूद है जिसक, सन्दर्भ के लिए, लिंक भी नीचे दी जा रही है. यह एक गैरव्यावसायिक बिना किसी लाभ का मेरे व्यक्तिगत प्रयास है जो हिंदी भाषी बच्चों को विदेशी साहित्य से परिचित करने के लिए किया जा रहा है. आशा है इस रचना के स्वत्वाधिकार स्वामी इस प्रयास को इसी परिप्रेक्ष्य में ग्रहण करेंगे.

GRANNY GRANNY PLEASE COMB MY HAIR, 

GRANNY GRANNY 
PLEASE COMB MY HAIR,
YOU ALWAYS TAKE YOUR TIME,
YOU ALWAYS TAKE SUCH CARE,

PUT ME ON A CUSHION,
BETWEEN YOUR KNEES,
RUB A LITTLE COCONUT OIL,
PARTING GENTLE AS BREEZE,

MUMMY MUMMY,
SHE ALWAYS IN A HURRY HURRY RUSH,
SHE PULLS MY HAIRS,
SOMETIMES SHE TUGS,

GRANNY GRANNY,
YOU HAVE ALL THE TIME,IN THE WORLD,
AND WHEN YOU ARE FINISHED,
YOU ALWAYS TURN MY HEAD AND SAY,
NOW WHO'S A NICE GIRL?



नानी, मेरे बालों में कंघी करो

-ग्रेस निकोल्स

नानी मेरी नानी मेरी बात सुनो,
आओ मेरे बालों में कंघी करो

कंघी बड़े आराम से करती हो तुम
सच, मेरी परवाह करती हो तुम

घुटनों के बीच में तकिया लगा
प्यार से लेती हो मुझको बिठा 

मंद-मंद-मंद पवन चलती हो ज्यों 
नारियल का तेल सिर में मलती हो यों 

पर मेरी मम्मी को देखो जरा 
जल्दी में करती हर काम बुरा 

झटके से बाल मेरे खींच देती वो
उफ़ कितनी तकलीफ है देती वो

पर नानी हो तुम तो धीरज वाली 
कंघी भी करती हो प्याली-प्याली 

कंघी के बाद मेरा मुंह अपनी ओर कर 
पूछती हो-'कौन मेरी बिटिया से सुंदर?.'

-हिंदी रूपांतर- रमेश तैलंग 
20-10-2012 





Please go to this link for details about the Poetess:
http://literature.britishcouncil.org/grace-nichols

Friday, October 12, 2012

हिंदी के पुरोधा बाल साहित्यकार डॉ. श्रीप्रसाद का निधन

अभी-अभी मित्र डॉ.प्रकाश मनु के सूत्र से एक हृदयविदारक समाचार मिला कि हिंदी के पुरोधा बाल साहित्यकार डॉ. श्री प्रसाद का देहांत हो गया. सूचना के अनुसार वे यहां मेक्स हॉस्पिटल साकेत में ह्रदय चिकित्सा कराने आए थे. वैसे वे स्वस्थ, कर्मठ और पहले
 की तरह रचनारत थे.पर ईश्वर के विधान को कौन जान सकता है. मेरी तथा पूरे बाल साहित्य प्रेमियों के परिवार की ओर से दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि.





काशी के बाबा थे






एक वरद हस्त थे
हंसमुख और मस्त थे
कविताएं रचते थे
कहानियां कहते थे
जहां बैठ जाते थे 
मेला लगाते थे 
खुलकर बतियाते थे 
खेला रचाते थे
बच्चों के दादा थे 
दादा से ज्यादा थे 
बिना कहे चले गए
हम सब तो छले गये,
काशी के बाबा थे 
क्या बोलें, क्या-क्या थे
कहां गया वो खेला?
कहां गया वो मेला?

बाबा कुछ तो बोलो,
दादा कुछ तो बोलो,
ऐसे क्यों चुप हुए?
नज़रों से गुम हुए,
विदा करें हम कैसे?
जाते हैं क्या ऐसे?

र.तै. 12-10-2012