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Saturday, October 27, 2012

दो किशोर गीत






दो किशोर गीत 

- रमेश तैलंग 

1. 

थैली का दूध मिला 
बोतल का पानी,
लल्लू, हम बच्चों की क्या जिंदगानी.

 गौरैया,गायें सब 
भाग गईं बस्ती से 
नाता अब नहीं रहा 
कोई भी मस्ती से
नानी को याद नहीं कोई कहानी.

 एक दो कबूतर बस 
गुटर-गूं-गुटर गाते
भूले-भटके से
खिड़की पर हैं आ जाते
थोड़ी-सी उछलकूद, थोड़ी नादानी.

 पहियों पर पांव है,
कोई कितना भागे?
रोज एक ही सवाल-
क्या बनना है आगे?
लिखने-पढ़ने में भी हद की बेईमानी.

2

कहो चांद से- 
वह भी एक दिन पढ़ने जाए 
सरकारी स्कूल में.


बस्ता कंधे पर लटकाए 
सिटी बसों में धक्के खाए
वह भी एक दिन जा टकराए 
किसी जने से भूल में.


कूल..कूल बस न बतियाए,
कभी-कभी माथा भन्नाए 
वह भी एक दिन थक कर आए 
चलते-फिरते धूल में.



1 comment:

  1. अच्छी कविताओं के लिए बधाई।

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