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Friday, October 19, 2012

जॉन क्लेयर का प्यारा-सा बाल गीत 'दुम मटकाऊ खंजन पंछी''



श्रमिक किसान के बेटे एवं क्लासिक कवि जॉन क्लेयर (1793-1864) का एक बेहद मनोरंजक बाल गीत है -दुम मटकाऊ खंजन पंछी' (Little trotty wagtail) जिसे  हिंदी रूपांतरण सहित यहां ससम्मान प्रस्तुत किया जा रहा है. 
यह एक गैरव्यावसायिक बिना किसी लाभ का मेरा  व्यक्तिगत प्रयास है जो हिंदी भाषी बच्चों को विदेशी साहित्य से परिचित करने के लिए किया जा रहा है. आशा है इस रचना के स्वत्वाधिकार स्वामी इस 

प्रयास को इसी परिप्रेक्ष्य में ग्रहण करेंगे.






दुम मटकाऊ खंजन पंछी

-जॉन क्लेयर (1793-1864)

दुम मटकाऊ खंजन पंछी दुम मटकाता  
बारिश की फुहारों का आनंद उठाता  

हंसी दबाकर,डग-मग डग-मग चाल दिखाता, 
मार झपट्टा किसी कीट को भोज बनाता

और कभी मक्खी पर अपनी नज़र गडाता
पंख सूखने से पहले ही  फुर उड़ जाता 

दुम मटकाऊ खंजन पंछी कीचड़ ऊपर
पदचिन्हों की छाप छोड़ता पंजों को धर  

खूब लगाता गोते फिर उथले पानी में
और कभी ऊपर आजाता मनमानी में 

घर है उसका पास यहीं सूअर बाड़े में 
गर्माहट अच्छी मिलती उसको जाड़े में

विदा तुम्हें ओ दुम मटकाऊ खंजन पंछी
आना, आना दुम मटकाते यूं ही कल इसी तरह 

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Little Trotty Wagtail
by John Clare (1793-1864)


Little trotty wagtail he went in the rain,
And tittering,   tottering sideways he ne'er got straight again,
He stooped  to get a worm, कीट  and looked up to get a fly,
And then he flew away ere his feathers they were dry.

Little trotty wagtail, he waddled in the mud,
And left his little footmarks, trample  where he would.
He waddled in the water-pudge, and waggle  went his tail,
And chirrupt  up his wings to dry upon the garden rail. 

Little trotty wagtail, you nimble   all about,
And in the dimpling water-pudge you waddle   in and out;
Your home is nigh   at hand, and in the warm pig-stye,
So, little Master Wagtail, I'll bid you a good-bye.

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टेक्स्ट/ चित्र सौजन्य: गूगल 





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