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Thursday, January 31, 2013

MY TODAY'S NURSERY RHYME: 1st FEB., 2013






Home work, Class work
Work, work, work.
Why we are given, Buddies,
So much of  work.

We have our own dreams,
Plans in mind.
Little bit of time, but
Hardly we find.

- Ramesh Tailang 


Pic. credit: Google

नानी की चिठ्ठी - 5 (1 फ़रवरी, 2013)



मेरे प्यारे चम्पू, पप्पू, टीटू, नीटू, गोलू, भोलू, किट्टी, बिट्टी, चिंकी, पिंकी, लीला, शीला, लवली, बबली, टोनी, मोनी,  खुश रहो.

मैं चाहती हूं, आज तुम सब मुझे सज़ा दो. और क्यों नहीं, जब छोटे कोई गलती करते हैं तो बड़े किसी न किसी बहाने उन्हें सज़ा देते रहते हैं तो अगर बड़े गलती करें तो उन्हें छोटे सज़ा क्यों न दें. अब तुम पूछोगे कि मेरी गलती क्या है. तो भई, गलती तो की है तुम्हारी नानी ने. उसका वादा था कि हर हफ्ते तुम्हें एक चिट्ठी लिखूंगी और अब हो गए महीने.. तो गलती हुई ना? और यही नहीं तुम्हें एन्नी फ्रैंक की कहानी सुनाने का भी वादा भी तो किया था पर वह भी पूरा नहीं हो पाया .पर अब सफाई भी दूं तो क्या दूं? ढलता शरीर है, कोई न कोई आधि-व्याधि पकडती ही रहती है. पर चलो कोई बात नहीं, अब तुम सजा न भी  दो तो मैं अपनी ओर से पुराना वादा तो शीघ्र  पूरा करूंगी ही और साथ ही जुर्माने के रूप में अभी एक ऐसी कहानी सुनाऊंगी जो तुम्हारे अंदर एक नई संकल्प शक्ति का संचार कर देगी है.
तो अब आलतू-फालतू बातों को छोड़ कर सबसे पहले वह कहानी सुनो तुम सब....कहानी के बाद बताऊँगी इसके लेखक का नाम और संपर्क का सूत्र जिससे तुम सब, यदि चाहो, तो उनसे अपने मन की बात भी कह सकते हो:
      इस कहानी का शीर्षक है :
फर्क पड़ेगा

आज स्कूल की पिकनिक में वह समुद्र तट पर आई हुई थी. उसका मन खेलकूद में नहीं लग रहा था. तभी समुद्र की एक तेज लहर आई और हजारों मछलियों को रेत पर पटक कर लौट गई.
     मछलियों को रेत में तडपते देखा तो उसका बाल मन करुणा से भर गया. वह उनके पास गई और अपने हाथ से पकड़कर एक-एक मछली को समुद्र के पानी में डालने लगी.
     वह कुल चार-पांच मछलियों को ही पानी में डाल पाई थी कि पास ही से गुजार रहे आदमी ने उसे ऐसा करते देख कहा –“यहां तो हजारों मछलियाँ पड़ी हैं बेटी! तुम्हारे ऐसा करने से क्या फर्क पड़ेगा?
     जिन्हें मैं पानी में डाल रही हूं, उनको फर्क पड़ेगा. अपनी धुन में मशगूल वह उस आदमी की ओर देखे बिना ही बोली.
            उसकी बात से प्रेरित होकर वह आदमी भी उसी नेक काम में जुट गया.
अब जल्दी से बताओ, कैसे लगी ये कहानी तुम सब को . है न प्रेरणास्पद? इस कहानी के लेखक है श्री मुरलीधर वैष्णव. वैष्णव जी भूतपूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं, आजकल जोधपुर-राजस्थान ( e-mail: rishivaishnav@yahoo.com) में रहते हैं. वे न केवल पठनशील विद्वान न्यायविद हैं अपितु एक सिद्धहस्त लघुकथाकार, बाल साहित्यकार भी हैं. यह कहानी उनके ही लघुकथा संग्रह –“अक्षय तूणीर से ली गई है.
दरअसल होता क्या है कि जब भी समाज, देश, और प्रकृति के लिए कुछ करने का अवसर आता है तो हममें से ज़्यादातर लोग इसी बहाने से पीछे हट जाते हैं कि यह तो बहुत बड़ा काम है, हम जैसे इक्के-दुक्के आदमियों से क्या फर्क पड़ेगा. पर फर्क पड़ता है, मेरे बच्चो. कितनी भी बड़ी संख्या क्यों न हो, उसकी शुरुआत इकाई से ही होती है. बस, दृढ संकल्प शक्ति और करने का हौसला होना चाहिए. अब भृष्टाचार से लड़ने की ही बात को ले लो, यदि हर आदमी अपनी संकल्प शक्ति और कर्म-शक्ति का उपयोग करे तो हर मुश्किल पर विजय प्राप्त की जा सकती है. है ना? सोचकर लिखना ज़रूर.... ढेर सारे आशीर्वाद सहित..

तुम्हारी प्यारी..प्यारी नानी 

MY TODAY'S NURSERY RHYME-III/ 30 JAN.2013




We have two hands
Left and right.
They are  to  work and
Not  to  fight



Those with one hand
Don’t do less
Those with no hands
Too impress


Everybody blessed here
With God’s grace
Life is a challenge
Let us face.

- Ramesh Tailang 

Pics credit: GOOGLE

Wednesday, January 30, 2013

MY TODAY'S NURSERY RHYME : 31 JAN. 2013




Ting tong..Ting..tong
Ting-ting Tong!
It is now time for 
Singing  a song

Song of Rain and 
Song of Light.
Song of day and 
Song of night.

- Ramesh Tailang 

photo credit: google 

MY TODAY'S NURSERY RHYME : 30.1.2013





Look, there is dense fog 

every where outside. 

But my school bus 

waiting for a fast ride. 


I wish, my school is 

run from my home.

So that I make great

fun from my home.


- Ramesh Tailang 


Photo credit: Google images