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Friday, June 21, 2013

मेरे चार नए बाल गीत

आम की डाली, नीचे झुक


आम की डाली, नीचे झुक,
नीचे झुक, एक आम दे,
आम दे, एक आम दे!

हत्थू मेरे छोटे से, ऊपर तक न जाते हैं,
भैया हैं पूरे नकटे, कंधोली न चढाते हैं,
खड़े-खड़े टाँगें दूखीं
थोड़ा-सा आराम दे!

आम मिले तो जल्दी से मैं भी अपने घर जाऊं,
खट्टा-मीठा जैसा हो चूस-चूस कर खा जाऊं,
एक आम के बदले में
तुझे ढेर से, राम दे!

बारिश के मौसम के हैं कई रूप


पिछली गली में झमाझम पानी,
अगली गली में है सुरमई धूप.
बारिश के मौसम के हैं कई रूप.

माई मेरी, देखो चमत्कार कैसा,
धोखाधड़ी का ये व्यापार कैसा,
किसना की मौसी की टोकरी में ओले,
बिसना की मौसी का सूखा है सूप.

सुनता नहीं सबकी ये ऊपर वाला,
उसके भी घर में है गडबड घोटाला,
चुन्नू के घर में निकल गए छाते,
मुन्नू के घर वाले रहे टाप-टूप.

बारिश के मौसम के हैं कई रूप.



पतंग मेरे घर आई



टूटकर पतंग मेरे घर आई.

थामे थी जिसकी उंगली हवा,
उसको दे दिया बीच में ही दगा,
पल भर भी दोस्ती न निभ पाई.
टूटकर पतंग मेरे घर आई.


टूटे ज्यों हरा पात शाख से,
टपके जैसे आंसूं आंख से,
पांव पर गिरे जैसे परछाई.
टूटकर पतंग मेरे घर आई.

न,न पतंग मेरी, मत रोना,
कसम तुझे, यूं उदास मत होना,
जीता वो जिसने ठोकर खाई.
टूटकर पतंग मेरे घर आई.
  
ओ कारी बदरिया!


ओ कारी बदरिया, पानी तो ला,
पर आंधी न ला.

उड़ जाएगा मेरी खोली का छप्पर,
बापू जब आएंगे बज्जी से थक कर,
पूंछेंगे, हाय राम, ये क्या हुआ?

मेहनत से हमने ये खोली बनाई,
बापू की खर्च हुई आधी कमाई,
बुंदियां  गिरा, पर न ओले गिरा.

ओ कारी बदरिया, पानी तो ला,

पर आंधी न ला 


- रमेश तैलंग 

चित्र सौजन्य : गूगल 

7 comments:

  1. तैलंग जी की इन कविताओं पर त्वरित प्रक्रिया—'प्रशंसा के लिए शब्द ही नहीं हैं.' विशेषकर पहली और चौथी कविता के लिए. ​यदि कुछ शब्द जुटा पाया तो बाद में लिखूंगा.

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  2. तैलंग जी की इन कविताओं पर त्वरित प्रक्रिया—'प्रशंसा के लिए शब्द ही नहीं हैं.' विशेषकर पहली और चौथी कविता के लिए. ​यदि कुछ शब्द जुटा पाया तो बाद में लिखूंगा.

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  3. आपके चारों गीत पढ़े। बार-बार पढे। विषय पुराने हैं लेकिन कहन नया है और शैली तो हमेशा से आपकी जुदा-जुदा सी रहती है। बधाई देना तो बनता है। स्वीकारें। सादर,

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  4. बच्चों के लिए काफी सुगम कवितायेँ...

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  5. गीत अच्‍छे हैं..संभवत:यह पहला ही ड्राफ्ट है, आप इन पर अभी काम कर रहे होंगे। कहीं कहीं अटकाव है, उसकी वजह से पढ़ने में बाधा आती है।

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  6. अच्छी कवितायें

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  7. अच्छे गीत है। मेरा मानना है कि गेयता में कहीं कहीं कुछ रुकावट लगती है। बधाई।

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