Translate

Thursday, July 11, 2013

तीन नटखट बाल कविताएँ


-1-
आज मेरी मम्मी ने खूब डांट-डपट की 
और मेरे गालों पर हल्की-सी चपत दी 
क्योंकि मैं शैतानी करता ही जा रहा था 
कैसे बताऊं मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था 
पर इस शैतानी ने सबक एक सिखा दिया
आगे का दांत मेरा जड़ से हिला दिया 
अब मैं मुंह बंद किये चुपचाप रहता हूँ.
हाहाहा - हीहीही करने से डरता हूँ.




-2-

हरी सब्जियों का एक दिन लगा चस्का
हरा हो गया चेहरा पूरी  किचन का 
लौकी -तोरी, पालक, लाए  घर वाले 
बेसन ने सब के मन मगर बदल डाले  
पालक, तोरी, सब के बन गए पकोड़े
प्लेट लिए सब के सब खाने को  दौड़े.





- 3-

सुबह-सुबह अपनी  स्कूल बस आई 
नींद हमारी तब तक पूरी  न हो पाई,
सीट पर झपकी ली, सबने जगा दिया 
ड्राइवर ने भी पों-पों हॉरन बजा दिया.


- रमेश तैलंग 
  



चित्र सौजन्य : गूगल






1 comment: