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Thursday, July 18, 2013

फ़िल्मी बातें - आज शुक्रवार है


भारतीय बाल चलचित्र समिति 
(Children's Film Society of India)
द्वारा १९५६ में प्रदर्शित पहली बाल फिल्म 
 'जलदीप'



           फिल्मों की बात हो और वह भी बच्चों की फिल्मों की तो चिल्ड्रेन'स फिल्म सोसायटी ऑफ इंडिया  का नाम आगे न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता. एक तरह से देखा जाए तो स्वतंत्र भारत में बच्चों के लिए सिनेमा  की अवधारणा और बाल फिल्मों का इतिहास ही चिल्ड्रेन'स फिल्म सोसायटी के इतिहास से शुरू होता है. इससे पूर्व बाल फ़िल्में पारिवारिक फिल्मों का ही हिस्सा मानी जाती रही और उनकी कोई स्वतंत्र पहचान भारत में बनी तो सी.ऍफ़.एस.आई के जन्म के साथ ही बनी.  सी.ऍफ़.एस.आई द्वारा मशहूर सिने-लेखक/गीतकार/निर्देशक केदार शर्मा के निर्देशन में बनी और  सन १९५६ में प्रदर्शित श्वेत-श्याम बालफिल्म 'जलदीप' को स्वतंत्र भारत में बनी पहली बाल फिल्म का दर्ज़ा प्राप्त है, हालांकि कुछ लोग सन १९३० में प्रदर्शित वी.शांताराम की फिल्म 'रानी साहेबा' को भी पहली  बालफिल्म मानते हैं. पर इसके प्रिंट मौजूद  हैं या नहीं इसकी प्रामाणिक जानकारी मुझे नहीं है.
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          जलदीप फिल्म का संगीत की स्नेहल भाटकर ने रचा और इसमें अभिनय किया अशोक कुमार, प्रीतिवाला, दुबे और चन्दन ने


'जलदीप' फिल्म के निर्देशक : केदार शर्मा 


          फिल्म की संक्षिप्त कथा यह है कि उसका कथा - नायक अशोक नाम का बालक है जिसके पिता एक लाइटहाउस के प्रभारी हैं. एक दिन अशोक  बिना किसी को बताये अपनी मित्र प्रीति को पाल-नौका में बैठाकर समुद्र की सैर कराने की ठान लेता है. इसमें साथ देता है चन्दन नाम का बालक, चन्दन  नौका का लापरवाह नाविक है. वह दोनों को अपनी झूठी शान दिखाने के लोभ में नाव को  खतरनाक जगहों से गुजारता है. दुर्भाग्य की बात,उसी  समय एक तूफ़ान भी समुद्र में आ जाता है. अब चन्दन, अशोक और प्रीति - तीनों की  ही जान पर बन आती है. अशोक के पिता को जैसे ही इसका पता चलता है तो वे अपनी जान पर खेल कर तीनों बच्चों की जान बचाते हैं. जान तो बच  जाती है सभी की पर क्या इस घटना से इन बच्चों को कुछ सबक मिलता है..यह तो तब पता चलेगा जब यह फिल्म देख ली जाए.

          'जलदीप' फिल्म बहुत पुरानी है पर शायद उसकी डी.वी.डी चिल्ड्रेन'स फिल्म सोसायटी में उपलब्ध हो. पता करना चाहो तो उनकी वेब साईट -www.cfsindia.org पर उनका फोन नंबर और पता दोनों मौजूद हैं.

          हाँ, इस बाल फिल्म के इक्के-दुक्के गाने youtube पर चाहो तो अभी सुने जा सकते हैं , लिंक दी जा रहे है -जैसे 'छोटा-सा पप्पू,

          चलते-चलते एक और महत्वपूर्ण बात यह कि जलदीप फिल्म को  1957 में वेनिस में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार भी मिला.


-रमेश तैलंग 

इनपुट्स एवं चित्र सौजन्य: सी.ऍफ़.एस.आई/googal 

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