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Saturday, December 21, 2013

किताबें नहीं हैं तो यहाँ पढ़िए : कुछ नटखट शिशुगीत - रमेश तैलंग

बकरी


में..में..बकरी मटक-मटक.
चली तो रस्ता गई भटक .
ब..ब..बचाओ! गले से उसके..
बोली निकली अटक-अटक..

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घोडा

टिक-टिक-घोडा टिम्मक-टिम.
चलता डिम्मक-डिम्मक-डिम.
जिसने छोड़ी ज़रा लगाम.
धरती पर आ गिरा धडाम.

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कबूतर

उड़ा कबूतर ऊपर-ऊपर
कित्ते ऊपर? इत्ते ऊपर!
नीचे कब तक आएगा?
उड़कर जब थक जाएगा!

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मुट्ठी

एक अँगूठा, उँगली चार
मिल जाएँ पंजा तैयार
पंजा बंद तो बन गई   मुठ्ठी
कर देगी अब सबकी छुट्टी.


- रमेश तैलंग  
+91 9211688748 

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